वीरेन डंगवाल - Viren Dangwal

August 04, 2026
वीरेन डंगवाल - Viren Dangwal

वीरेन डंगवाल (5 अगस्त 1947 – 28 सितंबर 2015) हिंदी समकालीन कविता के प्रमुख और विशिष्ट हस्ताक्षरों में से एक हैं। उनकी कविताएँ जनसाधारण के दैनिक संघर्षों, ग्रामीण व कस्बाई जीवन और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के प्रति गहरी संवेदना को व्यक्त करती हैं। उनकी दृष्टि में आम जीवन की वे छोटी-छोटी वस्तुएँ और स्थितियाँ भी महत्वपूर्ण बन जाती हैं जिन्हें सामान्यतः अनदेखा कर दिया जाता है।

जीवन परिचय (जीवनी तालिका)

विवरण जानकारी
पूरा नाम वीरेन डंगवाल
जन्म तिथि 5 अगस्त 1947
जन्म स्थान कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
निधन 28 सितंबर 2015 (बरेली, उत्तर प्रदेश)
शिक्षा एम.ए., डी.फिल. (इलाहाबाद विश्वविद्यालय)
व्यवसाय प्राध्यापक (बरेली कॉलेज) एवं वरिष्ठ पत्रकार
प्रमुख कविता संग्रह इसी दुनिया में, दुष्चक्र में स्रष्टा, स्याही ताल
प्रमुख पुरस्कार साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2004), श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार, शमशेर सम्मान, पहल सम्मान

साहित्यिक जीवन और विशेषताएँ

  • काव्य-शैली और भाषा:

    डंगवाल जी की भाषा अत्यंत सरल, सहज और आम बोलचाल की भाषा के करीब है। उन्होंने तद्भव और देसज शब्दों का सहजता से प्रयोग किया, जिससे उनकी रचनाएँ पाठकों के सीधे दिल तक पहुँचती हैं।
  • प्रमुख कृतियाँ:

    • इसी दुनिया में (1991): इनका पहला कविता संग्रह, जिसे साहित्यिक जगत में अत्यधिक सराहना मिली।

    • दुष्चक्र में स्रष्टा (2002): इनका दूसरा प्रसिद्ध काव्य-संग्रह, जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला।

    • कवि ने कहा (2000): इनकी चुनिंदा कविताओं का चयन।

    • स्याही ताल (2013): इनका तीसरा प्रमुख कविता संग्रह।

  • अनुवाद कार्य: उन्होंने विश्व साहित्य और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रमुख कवियों (जैसे पाब्लो नेरुदा, बर्टोल्ट ब्रेख्त और नाज़िम हिकमत) की कविताओं का हिंदी में सुंदर अनुवाद किया, जिसे 'अमरा Walk' के नाम से भी जाना जाता है।

  • पत्रकारिता: वे दैनिक 'अमर उजाला' के मुख्य सलाहकार संपादक रहे और लंबे समय तक 'बरेली कॉलेज' में हिंदी के प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे।