सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया एक प्रख्यात भारतीय इंजीनियर, राजनेता और विद्वान थे। उन्हें इंजीनियरिंग और राष्ट्र-निर्माण में उनके अग्रणी योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाना जाता है।
| नाम | सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (Sir Mokshagundam Visvesvaraya) |
| ख्याति / पेशा | महान सिविल इंजीनियर, मैसूर के 19वें दीवान, नीति-निर्माता एवं राष्ट्र-निर्माता (जन्मदिन 'अभियंता दिवस / Engineers' Day' के रूप में मान्य) |
| जन्म तिथि | 15 सितंबर 1861 |
| जन्म स्थान | मुद्देनहल्ली, कोलार जिला (वर्तमान चिक्कबल्लापुर जिला), कर्नाटक |
| पिता | मोक्षगुंडम श्रीनिवास शास्त्री (संस्कृत विद्वान एवं ज्योतिषी) |
| माता | वेंकटलक्ष्मी (वेंकटलक्ष्मम्मा) |
| करियर / प्रमुख योगदान | कृष्ण राज सागर (KRS) बांध का निर्माण; हैदराबाद शहर के लिए बाढ़ सुरक्षा प्रणाली का डिज़ाइन; पेटेंट ऑटोमैटिक फ्लडगेट्स (वियर फ्लडगेट्स) का आविष्कार; मैसूर के दीवान (1912–1918) के रूप में मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर और भद्रावती आयरन वर्क्स की स्थापना |
| पत्नी एवं संतान | लागू नहीं (आजीवन अविवाहित रहकर राष्ट्र निर्माण को जीवन समर्पित किया) |
| सम्मान | भारत रत्न (1955), नाइट कमांडर ऑफ द ब्रिटिश इंडियन एंपायर (KCIE - 1915) |
| निधन | 14 अप्रैल 1962 (बेंगलुरु, कर्नाटक — 100 वर्ष की आयु में) |

एम विश्वेश्वरैया का जीवन और कार्य भारत और उसके बाहर के इंजीनियरों और व्यक्तियों को प्रेरित करता है, जो राष्ट्र निर्माण और विकास में इंजीनियरिंग और नवाचार के महत्व पर जोर देता है।