देव आनंद - Dev Anand

September 17, 2026
देव आनंद - Dev Anand

देव आनंद हिंदी सिनेमा के सबसे मशहूर अभिनेताओं, निर्माताओं, निर्देशकों और लेखकों में से एक थे। अपने खास अंदाज़, स्क्रीन पर दमदार मौजूदगी और रोमांटिक छवि के लिए पहचाने जाने वाले देव आनंद का करियर छह दशकों से भी ज़्यादा लंबा रहा। उन्हें "देव साहब" और एवरग्रीन स्टार के नाम से जाना जाता था।

देव आनंद के बारे में कुछ खास बातें

पूरा नाम     धर्मदेव पिशोरीमल आनंद
लोकप्रिय नाम     देव आनंद
जन्म     26 सितंबर 1923
जन्म स्थान     शकरगढ़, पंजाब, ब्रिटिश भारत
पेशे     अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, लेखक
प्रोडक्शन हाउस     नवकेतन फिल्म्स
पत्नी     कल्पना कार्तिक
बच्चे    सुनील आनंद और देविना आनंद
सक्रिय वर्ष     1946–2011
निधन     3 दिसंबर 2011, लंदन
निधन के समय उम्र     88 वर्ष
प्रमुख सम्मान     पद्म भूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार


फिल्मों में एंट्री
देव आनंद ने 'हम एक हैं' (1946) से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्हें बड़ी कामयाबी 'ज़िद्दी' (1948) से मिली, जिसके बाद वे तेज़ी से बड़े स्टार बन गए। गुरु दत्त के निर्देशन में बनी फिल्म 'बाज़ी' (1951) में उनके काम ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक बड़ा नाम बना दिया और उस दौर में क्राइम/नॉयर जॉनर को लोकप्रिय बनाने में मदद की।

1950 के दशक में, वे 'जाल', 'टैक्सी ड्राइवर', 'सी.आई.डी.', 'पेइंग गेस्ट', 'काला पानी' और 'काला बाज़ार' जैसी फिल्मों में नज़र आए। उनका स्टाइलिश लुक, तेज़ी से डायलॉग बोलने का अंदाज़ और खास हाव-भाव उनकी स्क्रीन पर्सनैलिटी की पहचान बन गए।

देव आनंद की प्रमुख फिल्में
❀ बाज़ी (1951)
❀ टैक्सी ड्राइवर (1954)
❀ सी.आई.डी. (1956)
❀ पेइंग गेस्ट (1957)
❀ काला पानी (1958)
❀ काला बाज़ार (1960)
❀ हम दोनों (1961)
❀ तेरे घर के सामने (1963)
❀ गाइड (1965)
❀ ज्वेल थीफ (1967)
❀ जॉनी मेरा नाम (1970)
❀ हरे राम हरे कृष्णा (1971)
❀ देस परदेस (1978)

गाइड - एक ऐतिहासिक फ़िल्म
'गाइड' (1965) को देव आनंद के करियर की सबसे अहम फ़िल्मों में से एक माना जाता है। उनके भाई विजय आनंद के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म आर. के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी और इसमें रोमांस, ड्रामा और आध्यात्मिक विषयों का मेल था। इस फ़िल्म में अपनी एक्टिंग के लिए देव आनंद को 'बेस्ट एक्टर' का फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिला। यह फ़िल्म एकेडमी अवॉर्ड्स में 'बेस्ट फ़ॉरेन लैंग्वेज फ़िल्म' कैटेगरी के लिए भारत की एंट्री भी थी।

डायरेक्टर के तौर पर देव आनंद का करियर
देव आनंद ने 'प्रेम पुजारी' (1970) से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) और 'देश परदेस' (1978) जैसी फ़िल्मों का निर्देशन किया। उनके निर्देशन में बनी फ़िल्मों में अक्सर समकालीन सामाजिक मुद्दों और युवाओं की बदलती संस्कृति को दिखाया गया। 'हरे रामा हरे कृष्णा' ख़ास तौर पर हिप्पी संस्कृति और युवाओं में ड्रग्स से जुड़ी समस्याओं को दिखाने के लिए जानी गई। इस फ़िल्म ने ज़ीनत अमान को हिंदी फ़िल्मों के बड़े दर्शकों के बीच पहचान दिलाने में भी मदद की।

देव आनंद की निजी ज़िंदगी
देव आनंद ने 1954 में एक्ट्रेस कल्पना कार्तिक से शादी की। उनके दो बच्चे थे - सुनील आनंद और देविना आनंद। एक्टिंग से काफ़ी हद तक दूर होने से पहले कल्पना कार्तिक ने देव आनंद के साथ कई फ़िल्मों में काम किया।

देव आनंद के अवॉर्ड्स और सम्मान
❀ बेस्ट एक्टर के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड – काला पानी
❀ बेस्ट एक्टर के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड – गाइड
❀ पद्म भूषण – 2001
❀ दादा साहब फाल्के अवॉर्ड – 2002, भारतीय सिनेमा में बेहतरीन योगदान के लिए
❀ कई लाइफ़टाइम अचीवमेंट और इंडस्ट्री से जुड़े सम्मान

उनकी आखिरी फ़िल्म 'चार्जशीट' (2011) थी, जिसे उन्होंने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था। 3 दिसंबर 2011 को लंदन में 88 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही हिंदी सिनेमा के सबसे लंबे और सबसे खास करियर में से एक का अंत हो गया।

देव आनंद का करियर आज़ादी के बाद हिंदी सिनेमा के विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने रोमांस, क्राइम, ड्रामा और सामाजिक विषयों वाली फ़िल्मों में काम किया और साथ ही प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और राइटर की भूमिकाएँ भी निभाईं। गुरु दत्त और विजय आनंद जैसे फ़िल्ममेकर्स के साथ उनके सहयोग और नवकेतन फ़िल्म्स के ज़रिए उनके काम ने भारतीय सिनेमा में उनकी अहम जगह बनाने में बड़ा योगदान दिया।