संजय मिश्रा (Sanjay Mishra)भारतीय फ़िल्म जगत के एक कलात्मक एवं हास्य अभिनेता है। इन्होंने अधिकतर हिन्दी फिल्मों तथा टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया है। उन्होंने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत धारावाहिकों से की, उसके बाद वह छोटी-छोटी फिल्मों में काम करने लगे। कुछ समय बाद अमिताभ बच्चन के साथ उन्होंने एक विज्ञापन में काम किया, यह पहला समय था जब उन्हें किसी बड़े एक्टर के साथ काम करने का मौका मिला।
| नाम | संजय मिश्रा (Sanjay Mishra) |
| ख्याति / पेशा | भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन अभिनेता, निर्देशक (हास्य व गंभीर दोनों अभिनय में पारंगत) |
| जन्म तिथि | 6 अक्टूबर 1963 |
| जन्म स्थान | दरभंगा, बिहार, भारत (पालन-पोषण: वाराणसी, उत्तर प्रदेश) |
| पिता | शंभूनाथ मिश्रा (पत्र सूचना कार्यालय / सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत) |
| माता | श्रीमती मिश्रा |
| करियर / कार्यक्षेत्र | राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD - 1989 बैच) के पूर्व छात्र टीवी धारावाहिक 'चाणक्य' (1991) और फिल्म 'ओ डार्लिंग! ये है इंडिया!' (1995) से शुरुआत; लोकप्रिय धारावाहिक 'ऑफिस ऑफिस' में शुक्ला जी का किरदार; 'धमाल', 'गोलमाल' सीरीज, 'ऑल द बेस्ट' (धोंडू जस्ट चिल) जैसी फिल्मों में यादगार हास्य भूमिकाएं; 'आँखों देखी' और 'वध' के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर अवॉर्ड; 'मसान', 'कामयाब', 'दम लगा के हईशा' व 'भक्षक' में असाधारण गंभीर अभिनय |
| पत्नी | किरण मिश्रा (विवाह: 2009) [पूर्व विवाह: रोशनी अचरेजा से अलगाव] |
| संतान | 2 पुत्रियाँ (पल मिश्रा एवं लम्हा मिश्रा) |
उनके पिता शम्भुनाथ मिश्रा जो एक पत्रकार थे। जब सजंय नौ साल के थे तब उनका परिवार वाराणसी में आकर रहने लगा और उन्होंने अपनी पढाई वाराणसी के केंद्रीय विद्यालय बीएचयू कैम्पस से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बैचलर डिग्री पूरी करने के बाद 1991 में राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल में एडमिशन लिया। अभिनय करने की प्रेरणा उन्होंने अपनी दादी से मिली जो उस समय एक रेडियो चैनल के लिए गाती थीं। इनके दादा जी भी एक प्रतिष्ठित सेवा में कार्यरत थे।
संजय के जब पिता की डेथ हुई, तो वो एक्टिंग छोड़कर ऋषिकेश चले गए थे। जहां वो एक ढाबे पर काम करने लगे। दरअसल संजय अपने पिता के बहुत करीब थे। पिता की मौत ने उनको ऐसा झकझोरा कि वो गुमशुदा हो गए और अकेला महसूस करने लगे। संजय सौ से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे लेकिन इतनी फिल्मों के बाद भी उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। शायद इसी वजह से ढाबे पर संजय को किसी ने पहचाना भी नहीं। दिन बीतते गए और उनका वक्त ढाबे पर सब्जी बनाने, आमलेट बनाने में कटने लगा था।
संजय अपनी पूरी जिंदगी उस ढाबे पर काम करने में ही निकाल देते अगर रोहित शेट्टी ना होते। रोहित और संजय फिल्म 'गोलमाल' में साथ काम कर चुके थे। वो अपनी अगली फिल्म 'ऑल द बेस्ट' पर काम कर रहे थे और उसी दौरान उन्हें संजय का ख्याल आया। संजय फिल्मों में लौटने को तैयार नहीं थे, लेकिन रोहित शेट्टी ने उन्हें मनाया और फिल्म में साइन किया। इसके बाद तो फिर संजय का कभी बॉलीवुड छोड़ने का मन नहीं किया।
6 अक्टूबर, 1963 को बिहार के दरभंगा में जन्में संजय मिश्रा आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 2005 के क्रिकेट विश्व कप के दौरान ‘मौका मौका’ का विज्ञापन काफी पॉपुलर हुआ। इस एड में वह एप्पल सिंह के नाम का किरदार निभाते नजर आए। इस किरदार में उनका अंदाज क्रिकेटप्रेमियों और सिनेमाप्रेमियों के दिलों में बस गया। इससे उन्हें भारत के पड़ोसी देशों में भी पहचान मिली।
हाल ही संजय की नई फिल्म ‘बहुत हुआ सम्मान’ ओटीटी पर स्ट्रीम हुई है। इसमें उनके साथ राघव जुयाल, अभिषेक चौहान, राम कपूर, निधि सिंह और नमित दास जैसे कलाकार भी हैं। अविनाश सिंह और विजय नारायण वर्मा द्वारा लिखित, ‘बहुत हुआ सम्मान’ को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं।
शुक्ला जी (पान खाने वाले बाबू)
आंखों देखी (2015)
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD)।