पी. चिदंबरम भारतीय राजनेता - P. Chidambaram Indian politician

पी. चिदंबरम भारत के एक वरिष्ठ राजनेता, वकील, लेखक और पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख नेता के तौर पर, उन्होंने भारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा विभागों (पोर्टफोलियो) को संभाला है, खासकर वित्त और गृह मंत्रालय।

संसद में अपनी मजबूत उपस्थिति, कानूनी विशेषज्ञता और आर्थिक नीति की गहरी समझ के लिए पहचाने जाने वाले चिदंबरम कई दशकों से भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं।

पी. चिदंबरम के बारे में कुछ खास बातें:

पूरा नाम     पलानियप्पन चिदंबरम
लोकप्रिय नाम     पी. चिदंबरम
जन्म तिथि     16 सितंबर 1945
जन्म स्थान     कनादुकाथन, शिवगंगा जिला, तमिलनाडु
पेशे     वकील, राजनेता, लेखक
राजनीतिक दल     भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
जीवनसाथी     नलिनी चिदंबरम
बेटे     कार्ति पी. चिदंबरम
शिक्षा    B.Sc., B.L., M.B.A.
प्रमुख विश्वविद्यालय     मद्रास विश्वविद्यालय; हार्वर्ड विश्वविद्यालय
प्रमुख विभाग (पोर्टफोलियो)    वित्त, गृह मामले, वाणिज्य, कार्मिक
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र     शिवगंगा, तमिलनाडु
राज्यसभा     2016 में चुने गए; 2022 में फिर से चुने गए
खास सम्मान     आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवार्ड (उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार)
अन्य सम्मान CNN-IBN इंडियन ऑफ द ईयर – राजनीति, 2007

पी. चिदंबरम की शिक्षा:
पी. चिदंबरम की शैक्षणिक पृष्ठभूमि प्रभावशाली रही है, जिसमें सांख्यिकी, कानून और प्रबंधन शामिल हैं।
❀ मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हायर सेकेंडरी स्कूल, चेन्नई
❀ लोयोला कॉलेज, चेन्नई, जहाँ उन्होंने अपनी प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी की
❀ सांख्यिकी में B.Sc. – प्रेसीडेंसी कॉलेज, चेन्नई
❀ बैचलर ऑफ लॉज़ (B.L.) – मद्रास लॉ कॉलेज, जिसे अब डॉ. अंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के नाम से जाना जाता है
❀ मास्टर डिग्री – लोयोला कॉलेज
❀ MBA – हार्वर्ड बिजनेस स्कूल

पी. चिदंबरम का कानूनी करियर
❀ भारत के सबसे जाने-माने राजनेताओं में से एक बनने से पहले, चिदंबरम ने एक वकील के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी।
❀ उनकी कानूनी पृष्ठभूमि संसद में उनकी एक खास पहचान बन गई। उन्होंने व्यवस्थित तरीके से तर्क पेश करने के लिए ख्याति अर्जित की और अक्सर राजनीतिक बहसों में संवैधानिक, आर्थिक और वाणिज्यिक कानून के अपने ज्ञान का उपयोग किया। 
❀ उन्होंने भारत के सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट में एक सीनियर वकील के तौर पर प्रैक्टिस की है।
❀ अहम मंत्री पद संभालने के बावजूद, वकालत उनके प्रोफेशनल जीवन का एक अहम हिस्सा बनी रही।

पी. चिदंबरम – राजनीतिक सफर
❀ 1972    AICC में शामिल हुए
❀ 1973–76    अध्यक्ष, तमिलनाडु युवा कांग्रेस
❀ 1976–77    महासचिव, तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी
❀ 1984    आठवीं लोकसभा के लिए चुने गए
❀ 1985    केंद्रीय वाणिज्य उप-मंत्री बने
❀ 1985–86    कार्मिक और प्रशासनिक सुधार उप-मंत्री
❀ 1986–89    कार्मिक और गृह मामलों के राज्य मंत्री
❀ 1989    नौवीं लोकसभा के लिए चुने गए
❀ 1991    दसवीं लोकसभा के लिए चुने गए
❀ 1991–92    वाणिज्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
❀ 1995–96    वाणिज्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में वापसी
❀ 1996    ग्यारहवीं लोकसभा के लिए चुने गए
❀ 1996–98    केंद्रीय वित्त मंत्री
❀ 1997    चर्चित "ड्रीम बजट" पेश किया
❀ 1998    बारहवीं लोकसभा के लिए चुने गए
❀ 2004    चौदहवीं लोकसभा के लिए चुने गए; वित्त मंत्री बने
❀ 2004–08    पहली UPA सरकार के दौरान वित्त मंत्री
❀ 2007    CNN-IBN इंडियन ऑफ़ द ईयर – राजनीति
❀ 2008    26/11 के बाद केंद्रीय गृह मंत्री बने
❀ 2009    पंद्रहवीं लोकसभा के लिए चुने गए; गृह मंत्री बने रहे
❀ 2009–12    गृह मंत्री
❀ 2012    वित्त मंत्री के रूप में वापसी
❀ 2012–14    वित्त मंत्री
❀ 2014    UPA सरकार का कार्यकाल समाप्त; केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर हुए
❀ 2016    राज्यसभा के लिए चुने गए
❀ 2016–19    अध्यक्ष, गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति
❀ 2016    'स्टैंडिंग गार्ड: ए ईयर इन अपोजिशन' प्रकाशित
❀ 2017    'फियरलेस इन अपोजिशन' प्रकाशित
❀ 2018    'स्पीकिंग ट्रुथ टू पावर' प्रकाशित
❀ 2022    तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए फिर से चुने गए
❀ 2024    'द वाटरशेड ईयर: व्हिच वे विल इंडिया गो' प्रकाशित
❀ 2026    सक्रिय वरिष्ठ कांग्रेस सांसद/सार्वजनिक बुद्धिजीवी बने हुए हैं; INX मीडिया मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही जारी है

उनकी 2020 की प्रोफ़ाइल में दी गई संसदीय समय-सारणी राज्यसभा के आधिकारिक 'हूज़ हू' (Who's Who) रिकॉर्ड पर आधारित है। पी. चिदंबरम का सार्वजनिक करियर पांच दशकों से भी ज़्यादा लंबा रहा है, जिसमें राजनीति, कानून, अर्थशास्त्र और लेखन का मेल है।

उनकी सबसे अहम पहचान तीन क्षेत्रों से जुड़ी है:
❀ आर्थिक नीति: वित्त मंत्री के तौर पर उनके दो मुख्य कार्यकाल, खासकर 1997 का बजट और UPA के दौर में आर्थिक विस्तार।
❀ आंतरिक सुरक्षा: 26/11 के मुंबई हमलों के बाद गृह मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल और भारत के सुरक्षा ढांचे को मज़बूत करने की उनकी कोशिशें।
❀ संसदीय बहस: कानून और अर्थशास्त्र की पृष्ठभूमि वाले एक बेहतरीन वक्ता के तौर पर उनकी पहचान, जिसे 'आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवॉर्ड' (बेहतरीन सांसद पुरस्कार) से भी मान्यता मिली।
सरकार के अलावा, उनकी किताबों और अख़बारों में छपे लेखों ने उन्हें भारतीय अर्थशास्त्र, लोकतंत्र, शासन-व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और सार्वजनिक नीति पर एक प्रभावशाली टिप्पणीकार बनाया है।