नाना पाटेकर - Nana Patekar

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में हुआ। उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है। बचपन में आर्थिक तंगी का सामना करते हुए, उन्होंने संघर्षों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की।

नाना पाटेकर जीवनी (Nana Patekar Biography)

नाम नाना पाटेकर (Nana Patekar)
मूल नाम विश्वनाथ पाटेकर (Vishwanath Patekar)
ख्याति / पेशा प्रसिद्ध भारतीय फिल्म अभिनेता, लेखक, फिल्म निर्देशक एवं सामाजिक कार्यकर्ता
जन्म तिथि 1 जनवरी 1951
जन्म स्थान मुरुद-जंजीरा, कोलाबा जिला (वर्तमान रायगढ़ जिला), महाराष्ट्र
पिता दिनकर पाटेकर (कपड़ा व्यापारी एवं रंगकर्मी)
माता संजना पाटेकर (निर्मला पाटेकर)
करियर / कार्यक्षेत्र सर जे. जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से शिक्षा; मराठी व हिंदी थिएटर से शुरुआत; फिल्म 'गमन' (1978) से हिंदी सिनेमा में पदार्पण; कालजयी फिल्में: 'परिंदा', 'प्रहार' (निर्देशन भी), 'अंगार', 'क्रांतिवीर', 'खामोशी', 'अब तक छप्पन', 'वेलकम', 'नटसम्राट'; 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर पुरस्कार और पद्म श्री (2013) से सम्मानित; सूखा प्रभावित किसानों की सहायता हेतु 'नाम फाउंडेशन' (Naam Foundation) की स्थापना
पत्नी नीलकांती पाटेकर (रंगमंच अभिनेत्री एवं लेखिका — विवाह: 1978)
संतान मल्हार पाटेकर (पुत्र — अभिनेता व निर्देशक; ज्येष्ठ पुत्र हुमायू का अल्पायु में निधन हो गया था)
निधन गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

थिएटर से सिनेमा तक का सफर

नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी थिएटर से की। थिएटर में उनकी अभिनय प्रतिभा ने जल्द ही सिनेमा का दरवाज़ा खोल दिया।

पहली फिल्म और बॉलीवुड में एंट्री

नाना पाटेकर ने बॉलीवुड में 1978 में फिल्म ‘गमन’ से कदम रखा। हालांकि, उन्हें असली पहचान ‘परिंदा’ (1989) से मिली, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।

नाना पाटेकर: संवाद और अभिनय का जादूगर

उनकी दमदार आवाज और डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग बनाया। उनकी चर्चित फिल्में हैं:

  • क्रांतिवीर (1994)
  • अपहरण (2005)
  • वेलकम (2007)

सामाजिक योगदान और इंसानियत

नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी हैं। उन्होंने किसानों की मदद के लिए ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की।

विवाद और नाना का नजरिया

अपने स्पष्ट और बेबाक स्वभाव के कारण नाना पाटेकर कई बार विवादों में भी घिरे। लेकिन उन्होंने हर स्थिति का सामना ईमानदारी से किया।

पुरस्कार और सम्मान

  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (तीन बार)
  • फिल्मफेयर पुरस्कार
  • पद्मश्री सम्मान (2013)

नाना पाटेकर: एक प्रेरणा

नाना पाटेकर का जीवन संघर्ष, कड़ी मेहनत और ईमानदारी का प्रतीक है। वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं और हमेशा रहेंगे।

"नाना पाटेकर: अभिनय का वो सितारा, जो कभी धुंधला नहीं होगा।"

🕯️💔 भारतीय सिनेमा के सबसे सशक्त, बेबाक और बहुमुखी अभिनेताओं में से एक, पद्म श्री नाना पाटेकर जी के निधन पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि! 🙏✨

'क्रांतिवीर' की गूंजती आवाज़ से लेकर 'परिंदा', 'तिरंगा' और 'नटसम्राट' के अविस्मरणीय किरदारों तक, उन्होंने अपने असाधारण अभिनय से भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी और असल ज़िंदगी में 'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से किसानों व जरूरतमंदों की सेवा के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।

ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं परिजनों और प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति! 🌸💐

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FAQ

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम क्या था?

विश्वनाथ पाटेकर।

किस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था?

क्रांतिवीर (1994)

किसानों की सहायता के लिए उन्होंने किस एनजीओ (संस्था) की स्थापना की थी?

नाम फाउंडेशन (Naam Foundation)।