जे. पी. दत्ता (पूरा नाम: ज्योति प्रकाश दत्ता) भारतीय सिनेमा के एक प्रमुख फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता हैं, जो अपनी भव्य और यथार्थवादी शैली के लिए जाने जाते हैं। इनका जन्म 3 अक्टूबर 1949 मे मुंबई महाराष्ट्र में हुआ था। उन्हें विशेष रूप से बॉर्डर जैसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता देशभक्ति युद्ध फिल्मों और विशाल मल्टी-स्टारर ग्रामीण एक्शन ड्रामा के निर्माण के लिए पहचाना जाता है।
| पूरा नाम | ज्योति प्रकाश दत्ता (Jyoti Prakash Dutta) |
| ख्याति / पेशा | भारतीय फिल्म निर्देशक, निर्माता एवं पटकथा लेखक (युद्ध व देशभक्ति फिल्मों के लिए प्रसिद्ध) |
| जन्म तिथि | 3 अक्टूबर 1949 |
| जन्म स्थान | बॉम्बे (वर्तमान मुंबई), महाराष्ट्र, भारत |
| पिता | ओ. पी. दत्ता (ओम प्रकाश दत्ता - प्रख्यात फिल्म निर्देशक एवं संवाद लेखक) |
| माता | श्रीमती दत्ता |
| करियर / कार्यक्षेत्र | बड़े पैमाने की एक्शन और यथार्थवादी युद्ध फिल्मों के निर्माण के लिए विख्यात; प्रमुख फ़िल्में: 'बॉर्डर', 'एलओसी कारगिल', 'गुलामी', 'हथियार', 'बंटवारा', 'क्षत्रिय' और 'रिफ्यूजी'; फिल्म 'बॉर्डर' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म) एवं सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त |
| पत्नी | बिंदिया गोस्वामी (पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री - विवाह: 1985) |
| संतान | 2 पुत्रियाँ (निधि दत्ता - फिल्म निर्माता, एवं सिद्धि दत्ता) |
ज्योति प्रकाश दत्ता (जे. पी. दत्ता) का जन्म 3 अक्टूबर 1949 को मुंबई में हुआ था। जाने-माने फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक ओ. पी. दत्ता के पुत्र होने के नाते उन्हें घर में ही सिनेमाई परिवेश मिला। उन्होंने 1985 में एक्शन ड्रामा फिल्म गुलामी से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की। राजस्थान की पृष्ठभूमि और सामंती व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाती इस पहली ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता दर्ज की और भारतीय सिनेमा में उनके खास निर्देशन अंदाज की मजबूत नींव रखी।
जे. पी. दत्ता को हिंदी सिनेमा में भव्य और वास्तविक युद्ध फिल्मों के निर्माण के लिए सबसे अलग पहचान मिली। 1971 के भारत-पाक युद्ध (लोंगेवाला की लड़ाई) पर आधारित उनकी 1997 की ऐतिहासिक फिल्म बॉर्डर ने राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त प्रभाव छोड़ा। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने एलओसी कारगिल (2003) और पलटन (2018) जैसी फिल्में बनाकर भारतीय सैनिकों के शौर्य और मानवीय भावनाओं को पर्दे पर उतारा।
उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत विशालकाय मल्टी-स्टारर कास्ट, रेगिस्तान के खूबसूरत व विस्तृत दृश्य और गहरे भावनात्मक संवाद रहे हैं। युद्ध और एक्शन के अलावा उन्होंने बंटवारा, हथियार, क्षत्रिय और उमराव जान जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन भी किया। साल 2000 में आई उनकी फिल्म रिफ्यूजी ने हिंदी सिनेमा को अभिषेक बच्चन और करीना कपूर के रूप में दो प्रमुख कलाकार दिए। जे. पी. दत्ता का विवाह मशहूर अभिनेत्री बिंदिया गोस्वामी से हुआ, और भारतीय सिनेमा में देशप्रेम व सैन्य शौर्य को प्रामाणिकता से दर्शाने के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है।










देशभक्ति और युद्ध फिल्में।
बॉर्डर (1997)
बिंदिया गोस्वामी।